Hindi Story | Kismat Ka Khiladi | Top Motivational Story For Indian Youths

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Read interesting Hindi story - Kismat Ka Khiladi 

यह कहानी उस बबलू की है जो जीवन में बहुत कुछ हासिल करना चाहता था पर वह बचपन से यह सुन-सुन कर बड़ा हुआ था कि राम लाल की किस्मत अच्छी है इसलिए राम लाल, राम लाल है; उसकी किस्मत खराब है इसलिए वह ऐसा है; किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया, उसकी किस्मत इतनी खराब क्यों है; क्या कभी उसकी किस्मत बदलेगी कि नहीं – क्या होगा उसकी किस्मत का ?
बबलू को इस बात की खबर नहीं थी कि वह किस्मत के इस खेल में फँस चुका था । वह जब भी किसी के साथ अच्छा होते हुए देखता था तो वह बस यही सोचता था कि काश उसकी भी किस्मत ऐसी होती तो उसके साथ भी हमेशा अच्छा होता ।
बबलू 10+2 में दो बार फेल होने के बाद यह मान लिया था कि पढ़ना – लिखना उसकी किस्मत में नहीं । उसके पिता जी ने उसे कई बार कॉलेज भेजने का प्रयास किया पर वह हर बार यह कह कर टाल देता था कि अगर मैं एक बार फिर फेल हो गया तो मैं किसी को मुँह दिखाने लायक नहीं बचूँगा; मेरी भलाई इसी में है कि मैं दुबारा कॉलेज न जाऊँ ।
कई दिनों तक जब बबलू कॉलेज नहीं गया तो उसके दोस्त उससे मिलने उसके घर आ धमके ।
बबलू अपने पिता जी का स्कूटर चमकाने में लगा हुआ था । वह हमेशा अपने पिता जी को खुश करने में लगा रहता था; वो इसलिए कि उसकी नाकामयाबी पर भी उसे शाबाशी मिलती रहे ।
जैसे ही उसकी नज़र अपने दोस्तों पर पड़ी वह कुछ समय के लिए हड़बड़ा गया ।
“ अरे ! तुम सब यहाँ !” बबलू ने अपने दोस्तों की ओर देखते हुए हड़बड़ा कर कहा, “ आज कॉलेज बंद है, क्या ?”
“ नहीं, बस हम कॉलेज से ही आ रहे हैं ।“ बबलू के दोस्तों में से एक ने कहा, “ तुम कई दिनों से कॉलेज नहीं आ रहे थे तो हमने सोचा कि हम सब तुमसे मिलने आ जाते हैं !”
“ मैं अब कभी कॉलेज नहीं आऊँगा !” बबलू थोड़ा निरश आवाज़ में बोला, “ मेरी किस्मत में पढ़ना – लिखना नहीं है !”
“ फिर तुम्हारी किस्मत में क्या है ?” बबलू के दोस्तों में से एक ने कहा । “ क्या तुम्हारी किस्मत में सिर्फ डैडी का स्कूटर चमकाना है !”
“ नहीं !” बबलू गंभीरता से बोला, “ मेरी किस्मत इतनी भी खराब नहीं है कि मैं जिन्दगी भर यह स्कूटर चमकाता रहूँ !”
“ फिर तुम क्या करोगे ?” बबलू के दोस्तों में से दूसरे ने कहा, “ मेरा मानों तो तुम एक बार फिर कॉलेज आ जाओ ।”
“ कॉलेज कभी नहीं !” बबलू ने एक बार फिर जवाब दिया । “ मैं अपना खुद का बिजनेस शुरु करुँगा और उसी को मैं बड़ा बनाऊँगा, बस !”
“ जो लड़का कॉलेज पास नहीं कर सकता, वो बिजनेस में क्या पास होगा !” बबलू के पिता जी ने कमरे बाहर आते हुए उसके दोस्तों की ओर देखते हुए कहा, “ मैं इसे कॉलेज जाने के लिए समझा-समझा कर थक गया हूँ, पर इसे मेरी एक भी बात समझ में नहीं आती !”
“ तो बबलू तुम पक्का कर लिए हो कि-” बबलू के दोस्तों में से एक गंभीरता से बोला, “ तुम आज के बाद से कॉलेज नहीं आओगे, क्यों ?”
“ हां, मैं कभी कॉलेज नहीं आऊँगा ।” 
“ ठीक है, करो जो तुम्हारा मन करे ।” बबलू के दोस्तों में से एक ने कहा और सभी उसके घर से चले गये ।
दोस्तों के जाने के बाद बबलू के पिता जी ने बबलू को गुस्से से देखा ।
“ तो तुम सचमुच कॉलेज नहीं जाओगे ?” उन्होने बबलू सख्त लहजे में कहा ।
“ हाँ, ” बबलू बोला, “ मैं अब बिजनेस में अपनी किस्मत आजमाना चाहता हूँ ।”
“ क्या तुम्हें यकीन है कि तुम बिजनेस में सफल हो जाओगे ?”
“ अगर किस्मत अच्छी रही तो मुझे बिजनेस में सफल होने से कोई रोक नहीं सकता ।“
“ तुम्हें यकीन है कि तुम्हारी किस्मत बिजनेस में साथ देगी ?”
“ मैं इतने यकीन से कैसे कह सकता हूँ कि मेरी किस्मत साथ देगी या नहीं ।” बबलू गंभीरता से बोला, “ किस्मत का हिसाब किताब सिर्फ वे ही रखते हैं !”
“ कौन ?”
“ भगवान !”
“ तो फिर जाओ और जाकर भगवान से पूछ कर आओ कि-” बबलू के पिता जी ने कहा, “ किस्मत तुम्हारे बारे में क्या सोच रही है फिर मैं तुम्हें बिजनेस शुरु करने के लिए पैसे दूँगा वरना राम भरोसे सीता राम !”
पिता जी के फैसले ने बबलू को दुविधा में डाल दिया, उसकी चालाकी उसके काम नहीं आयी; अब वह बोलने वाले भगवान को कहाँ ढूँढ़े जो उसे उसकी किस्मत का हालचाल बता दे कि उसकी किस्मत उसके साथ अब क्या खेल खेलने वाली है ।
बबलू उस भगवान की तलाश में घर से निकल गया जो उसे यह बता दें कि जब वह बिजनेस शुरु करेगा तो उसकी किस्मत उसका साथ देगी या नहीं !
बबलू जिस भी भगवान के मंदिर जाता था, उस मंदिर के भगवान के घर इस बात को लेकर चर्चा शुरु हो जाती थी कि लोग अपने प्रयास से अपनी किस्मत को अपने साथ चलने के लिए मजबूर कर देते हैं, बबलू को कौन समझाए कि वह भी अपने लगातार कठिन प्रयास से अपनी किस्मत को अपना गुलाम बना सकता है । 
“ प्रभु !” भगवान की पत्नी ने कहा, “ क्या इस लड़के की किस्मत नहीं बदलेगी ।”
“ हर इंसान अपनी किस्मत का खुद मालिक होता है !” भगवान ने कहा, “ बस उसे जरुरत होती है एक इशारे की जो कभी भी किसी भी समय हो सकता है ।”
“ प्रभु, आप इस लड़के के लिए कुछ नहीं कर सकते ?” 
“ मैं क्या कर सकता हूँ ?”
“ प्रभु आप देख सकते हैं –” भगवान की पत्नी बोली, “ बबलू एक मंदिर से दूसरे मंदिर जा रहा है ताकि उसे उसके प्रश्नों के जवाब मिल सके और आप कह रहे हैं कि ‘ मैं क्या कर सकता हूँ ।‘ ”
“ सब कुछ पहले से तय है ।” भगवान ने कहा, “ इस बारे में हम कुछ नहीं कर सकते, समय आने पर बबलू को उसके सवालों का जवाब मिल जाएगा बशर्ते वह हिम्मत न हारे । हिम्मत हारने वालों की हम भी कोई मदद नहीं कर पाते ।”
“ आपका मतलब है कि अगर यह लड़का हिम्मत न हारे तो आप इसकी मदद करेंगे, क्यों ?”
“ हाँ, अगर वह हिम्मत नहीं हारेगा तो मैं एक इशारा करुँगा,” भगवान ने कहा, “ और उसके बाद उसकी जिन्दगी बदल जाएगी ।”
“ प्रभु ! यह इशारा कब होगी ?” भगवान की पत्नी बोली, “ मुझसे इस लड़के की छटपटाहट नहीं देखी जाती ।“
“ औरतों को सिर्फ लोगों का दुख-दर्द दिखता है, उस दुख-दर्द के पीछे छिपी सफलता नहीं दिखती । भगवान ने कहा, “ समय आने पर बबलू के लिए इशारा हो जाएगा ।”
“ जैसी आपकी मर्जी प्रभु !” भगवान की पत्नी ने कहा ।
सुबह से लेकर शाम तक बबलू भगवान की तलाश में एक मंदिर से दूसरे मंदिर तक गया पर उसे ना तो भगवान मिले ना ही उसके सवालों का जवाब । वह थका-हारा घर वापस लौट आया । उसके पिता जी उसे देखकर जोर से हँसे । 
“ पिता जी आप हँस रहे हैं ।” बबलू दुखी मन से बोला, “ मैं सुबह से लेकर शाम तक भगवान की तलाश में एक मंदिर से दूसरे मंदिर भटक रहा था पर भगवान नहीं मिले जो मुझे बता सके कि बिजनेस में मेरी किस्मत साथ देगी या नहीं !”
“ अरे पगले !” पिता जी ने कहा, “ मैं तो बस ऐसे ही मजाक में बोल दिया था कि भगवान से जाकर पूछ कर आओ कि तुम्हारी किस्मत बिजनेस में साथ देगी या नहीं ।”
“ तो पिता जी, भगवान तो नहीं मिले !” बबलू गंभीरता से बोला, “ आप मुझे बिजनेस करने के लिए पैसे देंगे या नहीं ?”
“ क्यों नहीं !” पिता जी ने कहा, “ पैसे तो मैं तुम्हें जो दूँगा पर मेरी एक शर्त है ।“
“ कैसी शर्त पिता जी ?”
“ यही कि जब बिजनेस चलने लगेगा तो तुम मुझे मेरा पैसा लौटा दोगे !”
“ हाँ, क्यों नहीं !”
“ अगर बिजनेस नहीं चला तो भी तुम काम कर करके मेरा सारा पैसा लौटाओगे ।”
“ ठीक है, पिता जी !” बबलू बोला, “ जैसी आपकी मर्जी !”
और इस तरह से बबलू को कॉलेज जाने से छुटकारा और बिजनेस करने के लिए पैसा मिल गया । उसने बिजनेस शुरु किया पर कुछ ही महीने बीते होंगे कि घाटा होने की वजह से बिजनेस भी ठप हो गया । बबलू के पिता जी ने साफ-साफ कह दिया था कि अगर बिजनेस नहीं चला तो उसे काम करके बिजनेस में लगा पूरा पैसा वापस देना होगा ।
“ क्या हुआ ?” पिता जी ने कहा, “ अब बिजनेस नहीं करोगे ?”
“ मुझे पता नहीं था कि इसमें भी मेरी किस्मत साथ नहीं देगी ।” बबलू दुखी मन से बोला, “ पिता जी आप चिंता न करें, मैं आपका सारा पैसा वापस लौटा दूँगा ।”
“ मैं चिंता क्यों करूँ !” पिता जी ने तपाक से कहा, “ चाहे जैसे कर मेरा पैसा वापस कर दो, बस !”
“ ठीक है, पिता जी !” बबलू बोला और मन ही मन सोचा, “ इतना सारा पैसा काम करके इकट्ठा करना मुश्किल नहीं नामुमकिन है ! अब क्या होगा ?”
बंद पड़े बिजनेस को बबलू चाहकर भी हाँथ नहीं लगाना चाहता था क्योंकि उसे यह यकीन हो गया था कि किस्मत उसके पक्ष में नहीं है अगर वह एक बार फिर बिजनेस में हाँथ लगाता है तो वह ना तो घर का होगा ना घाट का ।
“ बबलू, अब तुम क्या करने के बारे में सोच रहे हो ?” बबलू के पिता जी ने कहा, “ क्या तुम एक बार फिर बिजनेस के बारे में सोच रहे हो ?”
“ बिल्कुल नहीं ।”
“ अच्छा है, सोचना भी मत वरना तुम्हें इस घर से जाना पड़ सकता है ।”
“ मैं आपके पैसे को लौटाने के बारे में सोच रहा हूँ ।” बबलू बोला, “ काम कर करके इतना सारा पैसा लौटाना मतलब लोहे का चना चबाने जैसा है । मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं क्या करुँ !”
“ यह सब पैसा लेते हुए सोचना चाहिए था ।”
“ मैं नहीं जानता था कि मेरा बिजनेस नहीं चलेगा ।”
“ ज्यादा बकवास मत करो, कोई काम करो और मेरा पैसा वापस लौटाओ वरना बहुत बुरा होगा ।” पिता जी की बात सुनकर बबलू ज्यादा परेशान हो गया । वह काम की तलाश में घर से बहुत दूर चला आया । वह सुबह से लेकर शाम तक सड़कों पर भटका पर उसे कोई काम नहीं मिला । जब वह सब कुछ करके थक-हार गया तो उसके मन में एक बार फिर भगवान के मंदिर जाने का ख्याल आया । वह इस बार भगवान से खुब जिद्द करेगा कि उसे उसके सवालों का जवाब दिया जाए कि वह बार-बार फेल क्यों हो जाता है, उसकी किस्मत उसका साथ क्यों नहीं दे रही है ?
बबलू दूसरे दिन काम की तलाश में न जाकर सीधा मंदिर गया और वहाँ जाकर उसने भगवान से खुब शिकायत की ।
“ हे, भगवान आप सबकुछ देखकर अंधे क्यों बने हैं ?” बबलू भगवान से बोला, “ मैं दो बार कॉलेज में फेल हो गया तो मैंने आपसे कुछ नहीं कहा; पिता जी से पैसा लेकर बिजनेस शुरु किया उसमें भी किस्मत ने मेरा साथ नहीं दिया क्यों ? क्या मैं आपका बच्चा नहीं हूँ ? क्या मेरे तरक्की करने से आपको कोई जलन है ? क्या आप नहीं चाहते हैं कि मैं भी इस दुनिया में नाम कमाऊँ ? बोलिए आप इस तरह से चुप क्यों हैं ? क्या आप अंधे होने के साथ-साथ बहरे भी हैं।
“ प्रभु, देख रहे हैं, यह लड़का आपको एक ही साँस में क्या-क्या कह गया !” भगवान की पत्नी ने कहा, “ आपको अच्छा लग रहा है ?”
“ इसमें अच्छा और बुरा की क्या बात है !” भगवान बोलें, “ सब अपने ही बच्चे हैं, परेशान होने की वजह से थोड़े चिड़चिड़े हो जाते हैं ।”
“ अब तो कोई इशारा कर दीजिए, प्रभु !” भगवान की पत्नी ने विनम्रता से कहा, “ मुझे पता है आपके इशारा करते ही इस लड़के की जिन्दगी बदल जाएगी !”
“ अवश्य !” भगवान ने कहा ।
भगवान से शिकायत करते-करते बबलू की नज़र मंदिर की दिवार पर पड़ी जहाँ एक चींटी अपने वजन से सौ गुना वजन वाली चीज़ लेकर दिवार पर चढ़ने की कोशिश कर रही थी पर बार-बार गिर जा रही थी । बबलू अपनी नज़र उस चींटी पर गड़ा रखी थी – चींटी जब भी उस भारी चीज़ को लेकर दिवार पर चढ़ने की कोशिश करती थी बार-बार गिर जाती थी ।
चींटी सुबह से लेकर शाम तक दिवार पर चढ़ने की कोशिश करती रही और अंत में वह अपने प्रयास में सफल हो गयी । बबलू भी सुबह से लेकर शाम तक चींटी पर नज़र गड़ाए रखा तबतक जबतक वह दिवार पर चढ़ने में सफल नहीं हो गयी ।
चींटी बबलू को यह सीख दे गयी कि यदि जिन्दगी में सफल होना है तो तबतक प्रयास करते रहो जबतक जीत न मिल जाये ।
“ मुझे मेरे सवालों का जवाब मिल गया ! ” बबलू खुशी से चहकते हुए बोला, “ मेरी किस्मत खराब नहीं है, बस मैं प्रयास करने से पीछे भागता हूँ । मुझे किस्मत का खेल समझ में आ गया ! अब मुझे कोई रोक नहीं सकता !”
बबलू एक बार फिर अपना बिजनेस शुरु करने का निर्णय लिया और तबतक उसे करता रहेगा जबतक वह इसमें सफल न हो जाये ।
कुछ महीनों के कठिन प्रयास से बबलू का बिजनेस चल पड़ा । वह बिजनेस में लगा पिता जी का पैसा भी लौटाने में सफल हो गया । वह अब किस्मत का गुलाम नहीं बल्कि किस्मत उसका गुलाम बन गयी थी ।
“ प्रभु, यह तो कमाल हो गया !” भगवान की पत्नी ने कहा, “ आपके एक इशारे ने बबलू की जिन्दगी बदल दी !”
“ मैं हमेशा परेशान लोगों को कोई न कोई इशारा करता रहता हूँ, कोई पहचान लेता है तो कोई पहचान कर भी अंजान बना रहता है और किस्मत को दोष देता रहता है ।” भगवान ने कहा ।

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Hindi Story | Kismat Ka Khiladi | Top Motivational Story For Indian Youths Hindi Story | Kismat Ka Khiladi | Top Motivational Story For Indian Youths Reviewed by Angreji Masterji Varanasi on July 30, 2019 Rating: 5

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